विषधर काल सर्प दोष

     

    जब किसी की कुंडली में राहु नौंवे घर में होता है और केतु पांचवें घर में होता है और बाकि सभी ग्रह उनके बीच में विराजमान होते है तो बनता है विषधारी काल सर्प दोष || जिसकी कुंडली में यह दोष बनता है वो प्रेम सम्बन्ध में धोखा खता है और शादी होने के बाद उसके अपनी पत्नी से संबद्ध खराब रहते है || यह दोष की वजह से जातक के माँ बाप पर भी असर पड़ता है || यह दोष कभी भी जातक को बिना कोई परेशानी के नहीं बैठने देता कोई न कोई परेशानी खड़ी करता रहता है ||

     

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