वासुकि काल सर्प दोष

 

इस प्रकार के काल सर्प दोष में ग्रहो की स्थिति ऐसे होती है की राहु तीसरे घर में होता है और केतु नौंवे घर में विराजमान होते है और बाकि सातों ग्रह इनके मध्य में होते है || इस प्रकार के काल सर्प दोष के कारण इंसान को भाग्य की तरफ से मार खानी पड़ती है || इस दोष की वजह से इंसान मेहनती और ईमानदार होने पर भी कामयाब नहीं होता और इस दोष का असर जातक के छोटे भाई बहनो पर भी पड़ता है ||

 

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Pandit R.K. Shastri
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