शेषनाग काल सर्प दोष

 

यह दोष तब बनता है जब राहु बाहरवें घर में मौजूद हो और केतु छठे घर में विराजमान हो और सभी ग्रह इन दोनों के मध्य आ जाएं || इस दोष की वजह से जातक को अपने घर से दूर रहना पड़ता है और वो किसी न किसी बीमारी से घिरा रहता है और उसके दुश्मन भी बहुत होते है जो गुप्त रूप से उसको नुकसान पहुँचाते रहते है || जातक को कई बार यात्रा में भी परेशानियां झेलनी पड़ती है ||

 

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Pandit R.K. Shastri
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