कर्कोटक काल सर्प दोष

 

कर्कोटक काल सर्प दोष तब बनता है जब जातक की कुंडली में राहु की स्थिति आठवे घर में होती है और केतु होता है दुसरे घर में स्थित और बाकि सभी ग्रह इनके दरमियान होते है || यह दोष भी बहुत कष्टदायक होता है और जिसकी भी कुंडली में यह योग होता है उस इंसान की बोल बानी की वजह से उसके पारवारिक रिश्ते ख़राब हो जाते है और कई बार उसको घर से दूर रहना पड़ता है || और जिसकी भी कुंडली में यह दोष होता है उस इंसान के सेहत प्राय ख़राब रहती है और वो ख़ुदकुशी भी कर सकता है ||

 

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Pandit R.K. Shastri
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